UPI के नए नियम 2025-2026: यूजर्स के लिए जरूरी बदलाव और सुरक्षा बढ़ाने के उपाय
भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम में UPI एक क्रांति की तरह है, और 2025-2026 में NPCI के नए नियम इसे और मजबूत, सुरक्षित बनाते हैं। UPI नए नियम 2025-2026 यूजर्स की सुविधा बढ़ाने के साथ-साथ फ्रॉड रोकने और सिस्टम की क्षमता सुधारने पर फोकस करते हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने ट्रांजेक्शन लिमिट्स, ऑटोपे और सिक्योरिटी फीचर्स में बड़े बदलाव किए हैं। ये UPI अपडेट्स 2026 तक लागू हो रहे हैं, जो रोजाना करोड़ों ट्रांजेक्शन करने वाले यूजर्स के लिए महत्वपूर्ण हैं। आइए जानते हैं ये जरूरी बदलाव क्या हैं और ये आपकी सुरक्षा कैसे बढ़ाते हैं।
UPI ट्रांजेक्शन लिमिट्स और चार्जेस में मुख्य बदलाव 2025
UPI नए नियम 2025 में ट्रांजेक्शन लिमिट्स को और लचीला बनाया गया है। सामान्य P2P और P2M ट्रांसफर के लिए डेली लिमिट ₹1 लाख ही है, लेकिन स्पेसिफिक कैटेगरी जैसे कैपिटल मार्केट्स, इंश्योरेंस, ट्रैवल और गवर्नमेंट पेमेंट्स के लिए ₹5 लाख से ₹10 लाख तक की हायर लिमिट्स लागू की गई हैं (सितंबर 2025 से प्रभावी)। इससे बड़े निवेश या बिल पेमेंट आसान हो जाते हैं।
चार्जेस के मामले में अच्छी खबर है – बैंक अकाउंट से पर्सनल UPI ट्रांसफर पूरी तरह फ्री रहेंगे, चाहे ₹2000 से ऊपर ही क्यों न हों। वॉलेट-बेस्ड पेमेंट्स पर मर्चेंट्स को इंटरचेंज फीस देनी पड़ती है (0.5% से 1.1%), लेकिन यूजर्स पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं। ये UPI चार्जेस 2025 नियम यूजर्स को सस्ता और सुविधाजनक रखते हैं।
सुरक्षा बढ़ाने वाले नए फीचर्स और ऑथेंटिकेशन
UPI नियम 2025-2026 में सिक्योरिटी सबसे बड़ा फोकस है। अक्टूबर 2025 से बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन शुरू हो गया – अब फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन से ट्रांजेक्शन अप्रूव कर सकते हैं (₹5000 तक की लिमिट के साथ शुरूआत)। UPI PIN सेट या रीसेट के लिए आधार-बेस्ड फेस ऑथेंटिकेशन भी उपलब्ध है। इससे फ्रॉड की संभावना कम होती है।
ऑटोपे में बड़ा बदलाव – दिसंबर 31, 2025 तक सभी ऐप्स को सेंट्रल पोर्टल upihelp.npci.org.in से कनेक्ट करना है। यहां यूजर्स सभी एक्टिव मंडेट्स देख, मैनेज और पोर्ट कर सकते हैं (एक मंडेट को 90 दिनों में सिर्फ एक बार)। हर एक्शन पर PIN या बायोमेट्रिक कन्फर्मेशन जरूरी है। ऑटोपे अब सिर्फ ऑफ-पीक टाइम्स में प्रोसेस होते हैं, जो सिस्टम को स्थिर रखता है।
इनके अलावा, इनएक्टिव UPI ID (एक साल से ज्यादा निष्क्रिय) डिएक्टिवेट हो रही हैं, और रिसाइकल मोबाइल नंबर्स की रेगुलर चेकिंग अनिवार्य है।
सिस्टम एफिशिएंसी और ऑपरेशनल लिमिट्स
अगस्त 2025 से लागू नियमों में बैलेंस चेक 50 बार प्रति दिन प्रति ऐप तक सीमित है (एक्सीड करने पर 24 घंटे ब्लॉक)। हर ट्रांजेक्शन के बाद ऑटो बैलेंस दिखता है। लिंक्ड अकाउंट्स व्यू 25 बार डेली, और पेंडिंग ट्रांजेक्शन स्टेटस चेक सिर्फ 3 बार (90 सेकंड गैप के साथ)।
ये लिमिट्स सिस्टम ओवरलोड रोकती हैं और ट्रांजेक्शन स्पीड बढ़ाती हैं। मार्केट शेयर कैप (30%) को 2026 तक एक्सटेंड कर दिया गया, जो कॉम्पिटिशन बढ़ाएगा।
यूजर्स के लिए क्या मतलब है ये बदलाव
ये UPI नए नियम 2025-2026 यूजर्स को ज्यादा सुरक्षित और कंट्रोल्ड एक्सपीरियंस देते हैं। छोटी-मोटी लिमिट्स से रोजाना यूज पर असर कम है, लेकिन फ्रॉड प्रोटेक्शन और बायोमेट्रिक जैसे फीचर्स से विश्वास बढ़ता है। बड़े ट्रांसफर आसान हुए हैं, और ऑटोपे मैनेजमेंट ट्रांसपेरेंट। कुल मिलाकर, UPI और मजबूत हो रहा है – बस ऐप्स अपडेट रखें और सतर्क रहें।
FAQs
UPI ट्रांजेक्शन लिमिट 2025 में कितनी है?
सामान्य के लिए ₹1 लाख डेली, लेकिन कुछ कैटेगरी में ₹5-10 लाख तक।
UPI पर बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन कैसे काम करता है?
फिंगरप्रिंट या फेस से ट्रांजेक्शन अप्रूव, शुरू में ₹5000 तक की लिमिट के साथ।
UPI ऑटोपे में नए बदलाव क्या हैं?
सेंट्रल पोर्टल से सभी मंडेट्स मैनेज और पोर्ट करें, 31 दिसंबर 2025 तक लागू।